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*नवीन आचार्य शिक्षण वर्ग सैलाना में चतुर्थ दिवस* *संघ कार्य सर्वव्यापी व सर्व स्पर्शी- संतोष कापड़िया*

 *नवीन आचार्य शिक्षण वर्ग सैलाना में चतुर्थ दिवस* 

*संघ कार्य सर्वव्यापी व सर्व स्पर्शी- संतोष कापड़िया*

*रतलाम - रत्नपुरी ग्राम भारती शिक्षा समिति जिला रतलाम द्वारा सरस्वती विद्या मंदिर सैलाना में आचार्य परिवार के शैक्षिक व व्यक्तित्व विकास की दृष्टि से 07 दिवसीय नवीन आचार्य शिक्षण वर्ग के चतुर्थ दिवस में मुख्य वक्ता के रूप में रतलाम जिला कार्यवाह संतोष कापड़िया ने संवाद सत्र में हमारी मातृ संस्था राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की प्रारंभिक पृष्ठभूमि पर विचार रखते हुए बताया कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना विजया दशमी पर 1925 में डॉ केशव बलीराम जी हेडगेवार ने नागपुर में की संघ की स्थापना सामान्य नही थी उस समय की विपरीत परिस्थिति में चार हिंदू एक दीशा में केवल चौथे व्यक्ति के अर्थी पर होने से ही चलता था। हेडगेवार जी का जीवन गीता की तरह अध्ययन योग्य है। उन्होंने कई देश आजादी के आंदोलनो में मुख्य भूमिका निभाई।उन्होंने विचार किया के विश्व का नेतृत्व करने वाला देश 800 साल से गुलाम कैसे हुआ यह विचार कर संघ की स्थापना की कल्पना कि हम आज अपनी संस्कृति के बल पर स्थापित है! इतिहास में नक्षत्र की गणना और शून्य की खोज हमने की यह सब हमे भुला दिया गया। 


डा हेडगेवार ने एमबीबीएस के बावजूद अपने परिवार का न सोच कर राष्ट्र की चिंता की 1925 से 1940 तक संघकार्य सभी राज्य और प्रांत में पहुंचा।आज जो सपना हमने देखा था जो 500 साल के संघर्ष के बाद श्री राम का मंदिर बना। संघ प्रतिनिधि सभा में जो प्रस्ताव पारित हुए है जिसमें संघ के 100 वर्ष पूर्ण हो रहे है जिसमे कार्य को गति देने के लिए पंच परिवर्तन कुटुंब प्रबोधन वर्तमान में पश्चिम की संस्कृति मानी जाने लगी है जिससे परिवार बिखर रहे है परिवार एक स्थान पर बैठ कर भजन और भोजन करे और उस समय मोबाइल और टीवी से दूर रहे। किसी ऐतिहासिक या धार्मिक स्थल पर भ्रमण करे और परिवार में बच्चो से जुड़े रहे।पर्यावरण विषय पर चिंतन करने की आवश्यकता है मालवा जैसे प्रांत में तापमान सामान्य से अधिक बढ़ जाता है जो 42-45°हो जाता है पवित्र नदिया 90% प्रदूषित हो जाती है प्रतिदिन किसी न किसी रूप में प्लास्टिक जो सबसे घातक कचरा हमारे घर में आ जाता है जिसका निष्पादन नही हो पाता है हमारे जीवन काल में 10 पेड़ लगाकर उसका रक्षण करना।और उसकी चिंता करना।घर में पानी का यथा संभव संरक्षण करना।सामाजिक समरसता की दृष्टि से हमारे यहां कभी भी जाति भेद नहीं था केवल वर्ण व्यवस्था थी!


 गुण के आधार पर व्यक्ति के कार्य गुरुकुल तय करते थे ना की वर्ण या जाति से। संघ का कहना है किसी भी गांव का एक जलाशय,एक मंदिर और शमशान होना चाहिए।स्वदेशी अर्थात स्व का बोध होना चाहिए ।प्रतिदिन हमे सुबह से शाम तक स्व निर्मित अर्थात स्वदेशी  वस्तुओ का उपयोग करना,पश्चिम के कपड़े और वेशभूषा का उपयोग नहीं करना स्वदेशी भाषा का उपयोग करना चाहिए।नागरिक अनुशासन के अंतर्गत भारतीय नागरिक के रूप में अनुशासित अपने कर्तव्य का निर्वाह करना और राष्ट्रीय धरोहर का संरक्षण करना।बातचीत में अच्छी भाषा और शब्दो का उपयोग करना।शिक्षक के रूप में हमारे हाथ में आने वाला देश है शिक्षक के हाथ में ही निर्माण और प्रलय रहता है।इसलिए हमे हमारी जिम्मेदारी अच्छे से समझ कर कर्तव्य का निर्वाह करना होगा। इस अवसर पर जिला समिति सह सचिव मांगीलाल खराड़ी, समाजसेवी दिलीप पाटीदार, वर्ग संयोजक महेश पूरी गोस्वामी जिला प्रमुख महेंद्र सिंह मंडलोई मंच पर उपस्थित रहे! अतिथि परिचय तहसील प्रमुख  एलम सिंह मेवाड़ा द्वारा कराया गया! सत्र का संचालन वर्ग बौद्धिक प्रमुख दिनेश पुरी गोस्वामी द्वारा किया गया उक्त जानकारी जिला प्रचार प्रमुख विशाल पाटीदार द्वारा दी गई!!*

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