माता सती चरित्र एवं शिव-पार्वती विवाह प्रसंग पर झूमे श्रद्धालु।
सैलाना। पुरुषोत्तम (अधिक) मास के पावन उपलक्ष्य में ओशीन परिसर में आयोजित सप्त दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास पंडित कुलदीप गुरु भट्ट के मुखारविंद से माता सती चरित्र एवं भगवान शिव-पार्वती विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया गया।
कथा के दौरान पंडित कुलदीप गुरु ने बताया कि माता सती ने अपने पिता दक्ष प्रजापति के यज्ञ में भगवान शिव के अपमान को सहन न कर योगाग्नि द्वारा देह त्याग कर धर्म और आत्मसम्मान की रक्षा का संदेश दिया। इसके पश्चात उन्होंने माता पार्वती के रूप में पुनर्जन्म लेकर कठोर तपस्या के माध्यम से भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया।
कथाव्यास ने कहा कि भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह त्याग, तप, समर्पण एवं अटूट प्रेम का प्रतीक है। यह प्रसंग हमें जीवन में धैर्य, श्रद्धा और भक्ति का महत्व सिखाता है। कथा के दौरान शिव-पार्वती विवाह की मनोहारी झांकी प्रस्तुत की गई, जिससे श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। संगीतमय भजनों और कथा प्रसंगों पर श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से सहभागिता की।
कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और धर्मलाभ प्राप्त किया। आयोजक राजेंद्र पाराशर सौ. शशी पाराशर ने सभी श्रद्धालुओं से प्रतिदिन कथा श्रवण कर पुरुषोत्तम मास का पुण्य लाभ लेने का आग्रह किया गया।

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