सैलाना की यातायात व्यवस्था बदहाल, नाबालिग दौड़ाते रहते हैं बाइक, पुलिस का कोई अंकुश नहीं।
सैलाना - नगर की यातायात व्यवस्था दिन-ब-दिन बदहाल होती जा रही है। दिन में और सांझ ढलने के पश्चात छोटी उम्र के नाबालिग बच्चे दो पहिया वाहन बेखौफ दौड़ाते रहते हैं। ऐसा भी नहीं है कि केवल नाबालिग अकेले ही दो पहिया वाहन दौड़ा रहे हो, बल्कि वे तीन-तीन चार-चार सवारियों को बिठाकर दो पहिया वाहन दौड़ाते रहते हैं। पुलिस प्रशासन को तो गोया लगता ही नहीं कि इन पर रोक लगनी चाहिए। बस स्टैंड, सदर बाजार, दिलीप मार्ग, कालिका माता मार्ग या किसी भी व्यस्ततम इलाके में पुलिस की कोई व्यवस्था ही नहीं है, जो घटनाओं को रोकने में सहायक हो। पुलिस प्रशासन केवल उन्हीं दिनों में चालानी कार्रवाई करता है, जब ऊपर से उनके पास इस प्रकार के निर्देश हो। बाकी दिनों में कम से कम यातायात के मामले में तो लगता है कि पुलिस सिर्फ हाथ पर हाथ धरे बैठी है।
*मंगलवार शाम भी हुई दुर्घटना-*
मंगलवार शाम सैलाना के बायपास स्थित टंकी चौराहा पर मोटरसाइकिल और कार की टक्कर में एक नाबालिग को गंभीर चोटे आई। नाबालिग को घायल अवस्था में परिजन रतलाम उपचार हेतु ले गए। इधर लचर स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रकाश में आई। बताया जाता है कि जब नाबालिग को सैलाना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर उपचार हेतु ले जाया गया तो ना तो वहां डॉक्टर थे, और न हीं सरकारी एंबुलेंस। निजी वाहन से घायल बच्चे को उपचार हेतु परिजन रतलाम ले गए सातवीं कक्षा में अध्यनरत इस बालक का कल वार्षिक परीक्षा का पेपर भी है, जो संभवत वह न दे पाए।
*इस ओर बिल्कुल ध्यान नहीं*
सैलाना पुलिस का बदहाल यातायात व्यवस्था की ओर तो जैसे बिल्कुल ध्यान नहीं है। वैसे तो दिनभर ही नाबालिग तीन-तीन चार-चार सवारी को बिठाकर न केवल मुख्य बाजार, बल्कि नगर की सभी गली मोहल्ले में दौड़ते रहते हैं उनकी गति पर कोई नियंत्रण ही नहीं है। बुजुर्ग और बच्चों के लिए इस प्रकार के करतब खतरनाक साबित हो सकते हैं। कालिका माता मार्ग पर अक्सर शाम पांच बजे पश्चात बुजुर्ग और महिलाएं व अन्य नागरिक घूमने की दृष्टि से भी निकलते हैं। व मंदिर दर्शन करने के लिए भी। इस मार्ग पर बचना है तो आप स्वयं बचिये। क्योंकि नाबालिगों की गति पर तो कोई नियंत्रण है ही नहीं।
*मुख्य मार्ग पर अतिक्रमण भी बेशुमार*
नगर के मुख्य मार्ग पर खासतौर पर गणेश मंदिर से पैलेस चौराहे तक बेशुमार अतिक्रमण और दुकानों के बाहर फैला सामान भी यातायात को बाधित करता रहता है। ऐसे में बाइक पर व अन्य दो पहिया वाहनों पर नाबालिग के तेज गति से दौड़ने पर दुर्घटना का सशय बना रहता है अक्सर दुर्घटना होती भी रहती है। बड़ी दुर्घटनाएं तो प्रकाश में आ जाती है पर छोटी-मोटी दुर्घटना यूं ही आई- गई हो जाती है। पुलिस के पास अक्सर एक बना बनाया बहाना रहता है कि अमला कम है।
*स्वास्थ्य सेवाएं भी लचर*
गति दिवस दो प्रमुख जनप्रतिनिधियों द्वारा सैलाना के शासकीय अस्पताल का आकस्मिक निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं को एवं सफाई व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए थे पर लगता है इसका भी कोई असर स्वास्थ्य प्रशासन पर नहीं पड़ा। मंगलवार की दुर्घटना और चिकित्सा का नहीं मिलना इसी और इंगित करता है।
*माता-पिता भी ध्यान दें*
पुलिस के पास अमला इतना अधिक नहीं होता है कि हर गली मोहल्ले में भी हम पुलिस लगा सके। माता-पिता को भी विशेष रूप से ध्यान देकर अपने बच्चों को बाइक देने से बचना चाहिए। फिर भी हम मुख्य चौराहों पर चालानी कार्रवाई करते रहते हैं। यदि अब कोई नाबालिग बाइक चलाता पाया गया तो उसके पिता के खिलाफ विधिवत न्यायालय कार्रवाई कीजाएगी।
*पिंकी आकाश, थाना प्रभारी सैलाना*
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