जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित
सी.एम. राइज उत्कृष्ट विद्यालय सैलाना में समर कैंप का समापन हुआ
शासन के निर्देशानुसार जनजाति कार्य विभाग की सहायक आयुक्त श्रीमती पारुल जैन के मार्गदर्शन में विधालय में 2 से 13 मई तक 10 दिवसीय ग्रीष्मकालीन शिविर (समर कैंप )का आयोजन जनजाति कार्य विभाग के सी. एम. राइज विद्यालय में संपन्न
हुआ।
शिविर का समापन कार्यक्रम सैलाना क्षेत्र की पूर्व विधायक श्रीमती संगीता चारेल, जनपद अध्यक्ष श्रीमती कैलाशी बाई चारेल एवं सैलाना के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व श्री मनीष जी जैन के आतिथ्य में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि पूर्व विधायक श्रीमती संगीता चारेल ने कहा की समर कैंप से विद्यार्थियों की बहुमुखी प्रतिभा निखरती है और विद्यार्थियों को इसका लाभ लेना चाहिए ।
जनपद अध्यक्ष श्रीमती कैलाशी बाई चारेल ने समर कैंप आदिवासी क्षेत्र के लिए प्रथम बार का अनुभव बताया।
अनुविभागीय अधिकारी राजस्व श्री मनीष जी जैन ने छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए समर कैंप को उपयोगी बताया।
संस्था प्राचार्य श्री वीरेंद्र मिंडा ने शासन के निर्देशानुसार कैंप के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए इसकी कार्य योजना से अवगत कराया.
शिविर प्रभारी डॉ. राजेश सोनी ने बताया की समर कैंप की प्रतिदिन सरस्वती वंदना से शुरुआत होती थी और राष्ट्र गान पर समापन होता था ।
प्रतिदिन कैंप में विभिन्न गतिविधियां जैसे नृत्य, गायन, ढोलक वादन ,परंपरागत खेल, गणित की गतिविधियां, खेल गतिविधियां जैसे क्रिकेट ,बैडमिंटन, टेबल टेनिस, स्वास्थ्य गतिविधि जैसे रक्त चाप नापना, अंग्रेजी स्पोकन ,ड्राइंग , योगा, जुंबा ,पी .टी. अंताक्षरी , रस्सी कूद , रूमाल झपट्टा मार,कंप्यूटर प्रशिक्षण, प्राथमिक उपचार , सूर्य नमस्कार ,गणित ट्रिक्स,स्थानीय हॉट बाजार की जानकारी,यूसीमास इत्यादि गतिविधियों का संचालन कैंप में किया गया।
प्रारंभ में सरस्वती पूजन के बाद पूनम व्यास द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गयी. अतिथियों का स्वागत प्राचार्य, व्याख्याता सतीश यादव, सुमन राठौर, जयश्री शर्मा, सुशील श्रीवास्तव, भूपेश श्रीवास् आदि के द्वारा किया गया.छात्र कृष्णा और लखन पाटीदार द्वारा अपने अनुभव सुनाए गए. कैंप में प्रतिदिन उपस्थित रहने वाले और श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को अतिथियों एवम संस्था प्राचार्य के हाथों प्रमाण पत्र एवं मेडल प्रदान किए गए।
कार्यक्रम का संचालन व्याख्याता श्री मानसिंह डामोर ने किया एवं शैलजा दवे ने आभार माना।

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