सीएमओ की लापरवाही का खामियाजा: 5 दिन में आवारा कुत्तों का दूसरा हमला, 3 वर्षीय मासूम समेत पिता घायल।
सैलाना। नगर में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन नगर परिषद की ओर से अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने का खामियाजा आम नागरिकों, विशेषकर मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। गुरुवार को एक बार फिर नगर परिषद की लापरवाही उजागर हुई, जब भूरामल कॉलोनी में एक आवारा कुत्ते ने तीन वर्षीय मासूम और उसके पिता पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से नगरवासियों में भय और आक्रोश का माहौल है।
जानकारी के अनुसार भूरामल कॉलोनी निवासी तीन वर्षीय अयांश, पिता राकेश भील, गुरुवार सुबह स्कूल जाने के लिए अपने घर के बाहर खड़ा था। इसी दौरान उसके पिता पास में खड़ी अपनी बाइक लेने गए। तभी अचानक एक आवारा कुत्ता वहां पहुंचा और मासूम पर हमला कर उसे बुरी तरह नोच लिया। बच्चे की चीख-पुकार सुनकर पिता दौड़े और उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन कुत्ते ने उन पर भी हमला कर दिया। आसपास के लोगों ने किसी तरह दोनों को कुत्ते के चंगुल से छुड़ाया। घटना के बाद घायल बच्चे और उसके पिता का उपचार कराया गया।
यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले 18 जुलाई को नगर के भोई मोहल्ला क्षेत्र में भी एक आठ वर्षीय मासूम पर आवारा कुत्ते ने हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया था। उस समय नगर में इस घटना को लेकर लोगों में काफी आक्रोश देखने को मिला था। घटना के बाद नगर परिषद की मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) पूजा गोयल ने दावा किया था कि आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए विशेष टीम गठित की जा रही है और जल्द ही अभियान चलाया जाएगा।
हालांकि, पांच दिन बीत जाने के बाद भी नगर में ऐसा कोई अभियान शुरू नहीं हुआ। स्थानीय लोगों का आरोप है कि न तो कुत्तों को पकड़ने की कोई टीम मौके पर दिखाई दी और न ही नगर परिषद ने इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाया। नतीजा यह रहा कि एक और मासूम आवारा कुत्ते के हमले का शिकार हो गया।
नगरवासियों का कहना है कि नगर के कई वार्डों और कॉलोनियों में आवारा कुत्तों के झुंड खुलेआम घूम रहे हैं। सुबह-शाम स्कूल जाने वाले बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों पर हमले का खतरा लगातार बना हुआ है। कई बार शिकायतें करने के बावजूद नगर परिषद की ओर से केवल आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन धरातल पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होती।
लगातार सामने आ रही घटनाओं ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि 18 जुलाई की घटना के बाद तत्काल अभियान चलाकर आवारा कुत्तों को पकड़ा जाता, तो गुरुवार की यह घटना शायद नहीं होती। अब नागरिकों ने जिला प्रशासन और नगर परिषद से मांग की है कि बिना किसी देरी के विशेष अभियान चलाकर आवारा कुत्तों को पकड़ा जाए, ताकि भविष्य में किसी और मासूम को इस तरह की पीड़ा न झेलनी पड़े।


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