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श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु, कंस व कालयवन उद्धार की कथा का हुआ रसपान।

श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु, कंस व कालयवन उद्धार की कथा का हुआ रसपान।


सैलाना। पुरुषोत्तम (अधिक) मास के पावन उपलक्ष्य में ओशीन परिसर में आयोजित सप्त दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के षष्ठम दिवस पर कथा व्यास पंडित कुलदीप गुरु के मुखारविंद से भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा के दौरान कंस व कालयवन के उद्धार तथा श्रीकृष्ण- रुक्मिणी विवाह प्रसंग का विस्तार से वर्णन कर श्रद्धालुओं को भक्ति रस से सराबोर कर दिया।

      कथा व्यास पंडित कुलदीप गुरु ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने अधर्म और अत्याचार का अंत करने के लिए कंस का वध किया तथा उसे भी मोक्ष प्रदान किया। उन्होंने कहा कि भगवान अपने शत्रुओं का भी कल्याण करते हैं। इसी प्रकार कालयवन के उद्धार की कथा सुनाते हुए बताया कि भगवान की शरण में आने वाला प्रत्येक जीव अंततः कल्याण को प्राप्त करता है।

     कथा के दौरान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग का अत्यंत मनोहारी वर्णन किया गया। पंडित गुरु ने बताया कि रुक्मिणी जी भगवान श्रीकृष्ण को अपने आराध्य और पति के रूप में स्वीकार कर चुकी थीं। उन्होंने श्रीकृष्ण को संदेश भेजकर अपने हृदय की भावनाएं प्रकट कीं। भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का हरण कर उनका विवाह संपन्न कराया, जो सच्चे प्रेम, समर्पण और अटूट विश्वास का प्रतीक है। विवाह प्रसंग के वर्णन के साथ भजनों और संगीतमय प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

      कथा में उपस्थित श्रद्धालुओं ने जय श्रीकृष्ण और राधे-राधे के जयघोष के साथ वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कथा के समापन पर आरती एवं प्रसादी वितरण किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

कथा के दौरान रूकमणि विवाह में आई सींचावनी की राशि रूपए 11251 रुपए कथा व्यास पंडित कुलदीप गुरु एवं आयोजक राजेंद्र पाराशर,शशी पाराशर, डा. दीपक जोशी, क्रांति जोशी द्वारा गौशाला के लिए समिति को सौंपी गई।

आयोजन समिति ने बताया कि सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य समापन आज बुधवार को होगा। समापन अवसर पर विशेष पूजन, पूर्णाहुति, महाआरती एवं प्रसादी वितरण का आयोजन किया जाएगा। कथा के अंतिम दिवस में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। आयोजकों ने धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर कथा का लाभ लेने की अपील की है।

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