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सैलाना: सनातन धर्म हमें सिखाता है समरसता और प्रेम - संत श्री पंडित बालकृष्ण जी नागर

सैलाना: सनातन धर्म हमें सिखाता है समरसता और प्रेम - संत श्री पंडित बालकृष्ण  जी नागर

​सैलाना   गोपाल गोशाला  के सामने स्थानीय गोधूलिया हनुमान जी  मंदिर परिसर में  आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। कथा के द्वितीय दिवस पर सुप्रसिद्ध कथावाचक परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्री बालकृष्ण जी नागर ने भक्ति और अध्यात्म की गंगा बहाते हुए उपस्थित जनसमूह को मानव धर्म और सनातन संस्कृति के मूल तत्वों से अवगत कराया।

​रिश्तों में न हो भेदभाव: गुरुदेव का संदेश

​कथा के दौरान पंडित नागर ने विशेष रूप से सामाजिक समरसता और पारिवारिक मूल्यों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि:

​मानव धर्म सर्वोपरि: हमें केवल जन्म से ही नहीं, बल्कि अपने कर्मों से भी मानव धर्म को निभाना चाहिए। मानवता की सेवा ही ईश्वर की सच्ची भक्ति है।

​सनातन धर्म की महिमा: हम सनातनी हैं और हमें अपने धर्म के प्रति अटूट आस्था रखनी चाहिए। सनातन धर्म केवल एक पूजा पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की सर्वश्रेष्ठ कला है।

​समान व्यवहार: गुरुदेव ने मर्मस्पर्शी शब्दों में कहा कि हमारा धर्म हमें रिश्तों में भेदभाव करना नहीं सिखाता। चाहे परिवार हो या समाज, हमें सभी के साथ एक समान और स्नेहपूर्ण व्यवहार करना चाहिए।

​"सच्चा सनातनी वही है जिसके मन में किसी के प्रति विद्वेष न हो और जो सभी में उसी परमपिता परमेश्वर का अंश देखे।" — पंडित बालकृष्ण नागर

​भक्तिमय हुआ वातावरण

​द्वितीय दिवस की कथा के दौरान जब गुरुदेव ने भागवत महापुराण के प्रसंगों का वर्णन करते हुवे श्री शुकदेव जी का  जन्म वर्णन एवं राजा परीक्षित कथा का वर्णन करते हुवे कथा को विश्राम दिया ,  गोशाला परिसर 'जय श्री कृष्ण' के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। भजनों पर श्रद्धालु झूमते नजर आए।

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