गणगौर तीज श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई, पूर्व में नगर के राजा जीत कर लाए थे गणगौर।
सैलाना। नगर एवं आसपास के अंचल में गणगौर तीज का पर्व महिलाओं द्वारा बड़ी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया। सुबह से ही महिलाओं ने स्नान-ध्यान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए और गणगौर माता की पूजा-अर्चना के लिए निकल पड़ीं। पूरे भक्तिभाव से गणगौर पूजन कर महिलाओं ने भगवान शिव एवं माता पार्वती की आराधना करते हुए अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना की।
यूं तो गणगौर का पर्व राजस्थान में विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है, लेकिन अब यह परंपरा मालवा क्षेत्र में भी धीरे-धीरे प्रचलित हो गई है। सैलाना में इस पर्व का ऐतिहासिक महत्व भी रहा है। बुजुर्गों के अनुसार, पूर्व में यह उत्सव सैलाना के राजमहल में भव्य रूप से आयोजित होता था। बताया जाता है कि यहां के राजा गणगौर की प्रतिमा झाबुआ से जीतकर लाए थे, जिसके उपलक्ष्य में महल परिसर के पीछे भव्य जलसा आयोजित किया जाता था।
इस अवसर पर राजा द्वारा आसपास के गांवों में मुनादी कर ग्रामीणों को आमंत्रित किया जाता था। उत्सव में बाहर से नर्तकियों को बुलाया जाता था, जो अपने अद्भुत और हैरतअंगेज करतबों से दर्शकों का मन मोह लेती थीं। विशेष रूप से, महल के पीछे एक बड़े वृक्ष पर रस्सी बांधकर नृत्य करते हुए वे विभिन्न प्रकार की कलात्मक प्रस्तुतियां देती थीं, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र होती थीं। प्रदर्शन के बाद राजा द्वारा उन्हें भेंट देकर सम्मानपूर्वक विदाई दी जाती थी।
वर्तमान में भी सैलाना में यह परंपरा जीवंत है। इस वर्ष गणगौर पूजन डॉ. बसंतीलाल शर्मा के निवास पर संपन्न हुआ, जहां नगर की सुहागिन महिलाओं ने एकत्रित होकर विधि-विधान से गणगौर माता की पूजा की और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की।



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