Type Here to Get Search Results !
search tv halchal

इन दिनों टेसू के फूलों की आई बहार, कभी इन्हीं से खेली जाती थी होली।

इन दिनों टेसू के फूलों की आई बहार, कभी इन्हीं से खेली जाती थी होली।

सैलाना। मार्च माह की शुरुआत होते ही क्षेत्र में टेसू (पलाश) के पेड़ों पर केसरिया फूलों की बहार छा गई है। खेत-खलिहानों और पहाड़ियों पर खिले ये आकर्षक फूल प्रकृति की अनुपम छटा बिखेर रहे हैं। एक समय था जब होली का त्योहार इन्हीं टेसू के फूलों से बने प्राकृतिक रंगों के साथ मनाया जाता था।

पुराने समय में लोग रासायनिक रंगों से दूर रहकर प्राकृतिक रंगों का उपयोग करते थे। टेसू के फूलों को पानी में भिगोकर या उबालकर सुंदर केसरिया रंग तैयार किया जाता था। इस रंग से होली खेलने पर त्वचा पर किसी प्रकार का दुष्प्रभाव नहीं होता था। बुजुर्गों के अनुसार टेसू का रंग त्वचा के लिए लाभकारी माना जाता था और इससे पर्यावरण को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचता था।

लेकिन बदलते समय के साथ बाजार में रासायनिक रंगों की भरमार हो गई। आकर्षक पैकिंग और चटख रंगों के चलते लोगों ने प्राकृतिक रंगों से दूरी बना ली। परिणामस्वरूप टेसू के फूलों से होली खेलने की परंपरा धीरे-धीरे कम होती चली गई।

आज जब टेसू के पेड़ फिर से फूलों से लदे नजर आ रहे हैं, तो पुराने दिनों की यादें ताजा हो रही हैं। जरूरत है कि हम एक बार फिर प्राकृतिक रंगों की ओर लौटें और सुरक्षित एवं पर्यावरण अनुकूल होली मनाने की परंपरा को अपनाएं।

Post a Comment

0 Comments