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टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता से शिक्षक समुदाय खासा चिंतित, केन्द्र सरकार से हस्तक्षेप की गुहार।

टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता से शिक्षक समुदाय खासा चिंतित, केन्द्र सरकार से हस्तक्षेप की गुहार।

सैलाना।  दो ढाई दशक से जो बच्चों को पढ़ा रहे हैं वे अब खुद को साबित करने के लिए स्वयं बच्चे बन कर पढ़े तो उन्हें कैसा लगेगा। प्रदेश में इन दिनों ऐसा ही हो रहा हैं। वर्ष भर जिन गर्मी की छुट्टियों का शिक्षक कहीं घूमने फिरने के लिए इंतजार करते रहते हैं, कुछ अलग इंजॉय के लिए छुट्टियों का इंतजार करते थे वो इस वर्ष टीईटी की तैयारियों की बलि चढ़ चुकी हैं। मन मसोस कर जिले और सैलाना, बाजना का शिक्षक समुदाय अब बरसों बाद अपने आप को काबिल साबित करने की कवायद में जुट गया हैं। नौकरी पर लटकी तलवार उन्हें मानसिक त्रास अलग दे रही हैं। बहरहाल इस बार के ग्रीष्मावकाश का माहौल गोया कुछ अलग अलग सा प्रतीत हो रहा हैं,शिक्षक समुदाय के लिए।

*सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख*

दरअसल शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की मंशा से देश के सर्वोच्च न्यायालय ने 1998 से 2005 तक भर्ती किए गए शिक्षकों के लिए भी टेट की परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य करने के आदेश जारी कर दिए। 2005 के बाद भर्ती सभी शिक्षक टेट परीक्षा उत्तीर्ण किए हुए हैं ही। शिक्षा के अधिकार कानून का अक्षरशः पालन करने की मंशा इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की रही। प्रदेश भर के लाखों शिक्षक अपने अपने तर्कों के साथ जब भोपाल विरोध प्रदर्शन के लिए पहुंचे तो सरकार बैकफुट पर आ गई। प्रदेश शासन ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की। इसी माह के दूसरे सप्ताह में सुप्रीम कोर्ट ने फिर से याचिका पर सुनवाई की परंतु टीईटी की परीक्षा में किसी भी प्रकार की छूट देने से इन्कार कर दिया।

*सिर्फ 57 साल वालों को ही छूट*

सुप्रीम कोर्ट ने फिर कहा कि जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में सिर्फ 5 साल ही बचे हैं,उन्हें ही इस परीक्षा से छूट दी जाएगी। बाकी सभी जो टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण नहीं है उन्हें परीक्षा पास करनी ही होगी। यानी 57 साल से छोटी उम्र के वे शिक्षक जो टीईटी उत्तीर्ण नहीं हैं उन्हें कोई रियायत नहीं।

*अनगिनत दिक्कते*

उधर जानकारों का मत हैं कि जिस समय जो नियम रहते हैं, उनका पालन करते हुए ही शिक्षक भर्ती हुए। बरसों बाद फिर से परीक्षा दी जाए इसमें ढेर सारी दिक्कत है। पच्चीस तीस साल बाद क्या कोई आई ए एस, आईपीएस फिर से परीक्षा दे तो क्या ग्यारंटी की वो फिर से पास हो ही जाए। शिक्षक समुदाय का ये भी कहना है कि मनोविज्ञान भी यही कहता है कि परीक्षा देने और पढ़ने लिखने की भी एक आयु होती हैं। और यदि कोई ये परीक्षा एकाध नम्बर से भी उत्तीर्ण होने से चूक जाता हैं तो उसकी नौकरी गई।अब उस ढलान वाली उम्र में वे नौकरी कैसे ढूंढे।

*हजारों शिक्षकों की चिन्ता*

प्रदेश में ऐसे शिक्षकों का आंकड़ा एक से डेढ़ लाख के बीच,रतलाम जिले में 3 से 4 हजार के बीच और सैलाना बाजना ब्लॉक में 1 से डेढ़ हजार के बीच हो सकता हैं जिन्हें टेट परीक्षा से गुजरना होगा। कई शिक्षक, शिक्षिकाओं ने तो अपनी गर्मी की छुट्टियां ताक में रख कर अपने बड़े बड़े बच्चों के सामने हिचकिचाते हुए पढ़ाई भी शुरू कर दी,उनके बुढ़ापे का सवाल जो है।

*केन्द्र सरकार हस्तक्षेप करे।*

मध्यप्रदेश शिक्षक महासंघ के जिला अध्यक्ष एवं प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के जिला सचिव चरणसिंह चौधरी कहते हैं कि देश भर के लाखों,करोड़ो शिक्षकों की रोजी रोटी का सवाल है।केंद्र सरकार माननीय सर्वोच्च न्यायालय से अनुरोध करे और छूट दिलावे। शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के पहले भर्ती शिक्षकों को इस परीक्षा से मुक्ति दिलाना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है।वे कहते हैं कि इस वर्ष की पूरी छुट्टियां निकलने को हैं पर बड़ी संख्या में शिक्षक घर ही रहे।मानसिक त्रास जैसा भोग रहे हैं।

*शिक्षक का अपमान हैं ये*

राज्य कर्मचारी संघ तहसील अध्यक्ष जगदीश परिहार तो टीईटी परीक्षा को सीधे सीधे शिक्षक का अपमान ही मानते हैं।वे कहते हैं कि ये तो ऐसा हो रहा हैं कि बचपन में लगाने वाला टीका 52 साल की उम्र में लगे। बरसों के अध्यापन अनुभव को ही शिक्षक की योग्यता मान ली जाना चाहिए।परिहार सवाल उठाते हैं कि यूँ तो फिर जो स्टूडेंट शिक्षक से पढ़ कर उच्च पदों पर पहुंच गए उन्हें भी उनके पदों से वापस बुलाना चाहिए यदि शिक्षक काबिल नहीं था तो।वे भी केंद्र से हस्तक्षेप की मांग करते हैं।

*सुप्रीम कोर्ट का आदेश हैं*

जिला शिक्षा अधिकारी अशोक लोढ़ा कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के परिप्रेक्ष्य में वरिष्ठ कार्यालय जो भी आदेश देगा उसका पालन करेंगे।

*संभवतः जुलाई, अगस्त में होगी परीक्षा*

प्रदेश में संभवतः ये परीक्षा राज्य शिक्षा विभाग या राज्य शिक्षा बोर्ड जुलाई, अगस्त में आयोजित करेगा।

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