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सैलाना में पुलिस जवानों के लिए सुविधाजनक आवास की जरूरत, एसडीओपी ने किया निरीक्षण।

सैलाना में पुलिस जवानों के लिए सुविधाजनक आवास की जरूरत, एसडीओपी ने किया निरीक्षण।

नितेश राठौड़ 

सैलाना। जिनको आमजन की सुरक्षा के लिए दिन रात तैनात किया जाए,जिनकी ड्यूटी का कोई समय निर्धारित ही न हो, जब हम कड़ाके की ठंड,बरसात में चैन की नींद सो रहे होते हैं तब वे रात्रि जागरण कर चोर उचक्कों से जनता की सुरक्षा के लिए तैनात रहे और जब सुविधा की बारी आए तो उन्हें पुराने जर्जर आवास दे दिए जाए और वो भी सभी को नहीं। तो इस व्यवस्था को निःसंदेह धिक्कारने का मन करता हैं।सैलाना में पुलिस कर्मियों के लिए जो दो कॉलोनियां बनी हैं उनमें से एक तो आजादी से पहले की हैं और दूसरी की भी कोई पांच दशक से ज्यादा समय बीत गया। ऐसी टूटी फूटी सुविधा भी कोई सबको उपलब्ध नहीं।जैसे तैसे पुलिस जवान जीर्ण शीर्ण आवासों में अपने परिवार के साथ जीवन यापन कर रहे हैं।

*दोनों कॉलोनियों की स्थिति दयनीय*

सैलाना में पुलिस कर्मियों के आवास के नाम पर दो कॉलोनियां बनी हैं। और दोनों ही कॉलोनियों के मकानों को मकान कहना ही गलत होगा। बोदीना मार्ग पर बनी कॉलोनी कोई पांच दशक पुरानी हैं। पूरी तरह जर्जर इस कॉलोनी में कोई नहीं रहता। यहां बिजली, पानी की कोई व्यवस्था नहीं हैं। कभी कभार आपदाकाल में जब बाहर से पुलिस फोर्स बुलाया जाता हैं तब उन पुलिस कर्मियों को ठहराने के लिए इन मकानों का उपयोग होता हैं। बिना सुविधा के इन जर्जर मकानों में पुलिस जवान अपना समय काट लेते हैं।


*दूसरी कॉलोनी रियासत काल की*

सैलाना नगर परिषद कार्यालय के सामने बनी हुई पुलिस कॉलोनी रियासत काल की हैं। आजादी के पहले यहां जेल हुआ करती थी। थाना प्रभारी का आवास ज्यादा जीर्णशीर्ण होने के कारण ध्वस्त कर दिया गया।हालांकि थाना प्रभारी के लिए अब इसी परिसर में एक दूसरा छोटा आवास बनाया गया हैं। पर बाकी के ज्यादातर आवास रहने लायक ही नहीं है। यहां के मकान, मकान नहीं बल्कि मकानों के अवशेष ही कहे जा सकते हैं।

*कुल 43 जवान और दो अधिकारी की तैनाती हैं यहां पर*

सैलाना एसडीओ पुलिस कार्यालय सहित सैलाना में 43 जवान और दो अधिकारी है। इनमें थाना प्रभारी के आवास के नाम पर तो फिर भी छोटी मोटी व्यवस्था हैं पर क्षेत्र के सबसे बड़े पुलिस अधिकारी एसडीओ पुलिस के लिए विभाग का कोई आवास नहीं हैं।

*सिर्फ 10 जवानों को हैं आवास सुविधा*

इतने बड़े अमले में सिर्फ दस पुलिस जवानों को ही नगर परिषद कार्यालय के सामने बनी रियासतीकाल की कॉलोनी में आवास सुविधा मिल हुई हैं। वो भी सौ साल से भी ज्यादा पुराने आवासों में जैसे तैसे परिवार के साथ जीवन यापन कर रहे हैं। बाकी के 33 जवान जैसे-तैसे अपनी व्यवस्था करके रह रहै है।

*एसडीओपी ने सुध ली*

हाल ही में सैलाना एसडीओपी नीलम बघेल ने इस मामले में पहल करते हुए पुलिस जवानों के परिजनों की सुध ली।वे सैलाना नगर की एकमात्र पुलिस कॉलोनी पहुंची और आवासों की स्थिति को देखा। बघेल ने बताया कि इस कॉलोनी में कुल 18 आवास हैं जिनमें से 8 जर्जर अवस्था में हैं। 10 जवान परिवार के साथ निवासरत हैं। बघेल ने इन आवासों में जरूरी मरम्मत कराने, कॉलोनी में रोड बनवाने और अन्य सुविधाओं के लिए प्रस्ताव बना कर पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन के माध्यम से भेजने निर्देश थाना प्रभारी को दिए।


*पारिवारिक माहौल में चर्चा की*

एसडीओ पुलिस बघेल ने पुलिस जवान के परिजनों से बिल्कुल पारिवारिक माहौल में चर्चा की और आश्वस्त किया कि विभाग हर संभव सुविधा देने की कोशिश करेगा। पुलिस जवान पूरे महकमे की रीढ़ होते हैं। उन्हें सुविधा प्रदान करना जरूरी हैं।अच्छा माहौल देना भी जरूरी हैं।

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