नगर में अतिक्रमण बेलगाम, प्रशासन की चुप्पी से बिगड़ते हालात, जनता परेशान, जिम्मेदार बेपरवाह।
नईदुनिया न्यूज सैलाना : नगर में अतिक्रमण ने अब विकराल रूप ले लिया है। हालात यह हैं कि मुख्य सड़कों, बाजारों, चौराहों, नालियों पर भी बेधड़क अतिक्रमण पसारा जा रहा है, लेकिन स्थानीय प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है। नगर की सुंदरता और व्यवस्था दोनों ही अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुकी हैं।
नगर के प्रमुख बाजार क्षेत्रों में दुकानों के आगे अवैध रूप से शेड, टीन, तख्त, ठेले व दुकानदारों ने नालियों के आगे तक कपड़े भी लटका कर स्थायी अतिक्रमण कर लिए गए हैं। इससे सड़कें संकरी हो गई हैं और दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ नाम मात्र के रह गए हैं, जिस कारण आम नागरिकों, बुजुर्गों, महिलाओं और स्कूली बच्चों को सड़क पर जान जोखिम में डालकर चलना पड़ता है।
अतिक्रमण के कारण नालियां भी ढंक दी गई हैं, जिससे गंदगी और जलभराव की समस्या बढ़ रही है। बारिश के दिनों में यही अतिक्रमण बीमारियों को न्योता देते हैं। इसके बावजूद नगर परिषद और संबंधित विभागों द्वारा न तो नियमित निरीक्षण किया जा रहा है और न ही ठोस कार्रवाई।
गलियों में भी दुकानदारों ने कर रखा है अतिक्रमण स्थानीय रहवासियों का आरोप है कि प्रशासन केवल कागजी कार्यवाही और दिखावटी अभियान तक सीमित रह गया है। कभी-कभार अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया भी जाता है तो वह केवल कमजोर और छोटे दुकानदारों तक सिमट कर रह जाता है, जबकि प्रभावशाली लोगों के अतिक्रमण जस के तस बने रहते हैं। कुछ ही दिनों में हटाया गया अतिक्रमण दोबारा पहले से भी ज्यादा फैल जाता है।
नगरवासियों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जब नियम सभी के लिए समान हैं तो फिर कार्यवाही में भेदभाव क्यों? जनता का कहना है कि प्रशासन की लापरवाही और मिलीभगत के चलते ही अतिक्रमणकारी बेखौफ होकर काम कर रहे हैं।
नगर के सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि अतिक्रमण के खिलाफ निष्पक्ष, सख्त और स्थायी अभियान चलाया जाए। साथ ही अतिक्रमण करने वालों पर जुर्माना और कानूनी कार्यवाही भी सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी नियम तोड़ने का साहस न कर सके।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन कुछ कार्यवाही करेगा या फिर नगरवासी यूं ही अतिक्रमण, जाम और अव्यवस्था के बीच जीवन जीने को मजबूर रहेंगे? जनता की नजरें अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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