महाविद्यालय में लगा समरसता का कुंभ
आर्ट ऑफ लिविंग , ब्रम्हाकुमारी , सिख संगत व गायत्री परिवार के विद्वानों का हुआ संगम
सैलाना । जीवन में यदि हमारी आवश्यकताएं , जिम्मेदारियों से कम होगी तो निश्चित ही समरसता , सुखी जीवन की ओर यह पहला कदम होगा । जहां इच्छाएं , स्वार्थ कम है वहां निश्चित ही परिवार में , पड़ोस में , देश में सबके भले में स्वयं का भला सोचा जाता है ।
उक्त विचार सैलाना महाविद्यालय में श्री श्री रविशंकर " आर्ट आफ लिविंग " के डॉक्टर मिलिंद डांगे ने "आजादी का अमृत महोत्सव " के अंतर्गत आयोजित " समरसता अभियान " पर कार्यक्रम में व्यक्त किए।
सिख संगत की ओर से सुरेंद्र सिंह जी भामरा ने खालसा पंथ और समरसता का उत्कृष्ट उदाहरण देते हुए बताया कि जब हम " स्व " को खोज लेंगे तो सहज ही सब के प्रति हमारे मन में समानता की भावना जागृत हो जाएगी।
ब्रह्मा कुमारी रजनी दीदी ने परमात्मा की दिव्य ज्योति के आलोक से प्रकाशित इस संसार में सभी को समान बताया । समरसता ही हमें ईश्वरत्व की ओर ले जाती है।
गायत्री परिवार के कांतिलाल जी राठौर ने भारत की संस्कृति को समरसता की संस्कृति बताते हुए कहा कि हर एक पंथ , धर्म की मंजिल एक ही है। वह है समानता। हमें सभी को समान समझना होगा तभी यह विश्व रहने योग्य रहेगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ एस सी जैन ने कहा कि करुणा और दया के बिना समरसता नहीं हो सकती।
इसके पूर्व कार्यक्रम का दायित्व निभा रहे प्रोफेसर भूपेंद्र मंडलोई एवं एसएस रावत द्वारा अतिथियों का पुष्प मालाओं से स्वागत किया गया । कार्यक्रम में सभी प्राध्यापकगण, कार्यालयीन स्टॉफ एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। संचालन नोडल डॉ बालकृष्ण चौहान एवं आभार संयोजक डॉ सौरभ ई लाल ने माना।






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