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 सैलाना (निप्र) दो हजार के नोट के बंद होने की घोषणा का सैलाना में कोई खास असर नहीं नजर आ रहा है। यहां के व्यापारी वर्ग का कहना है कि एक तो सरकार ने दो हजार के नोट बंद करने के लिए काफी समय सीमा दी है, और दूसरा अन्य सहूलियते भी प्रदान की है। इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। इसे 2016 की नोटबंदी की तरह देखना गलत है।
 मिडीया से  शनिवार दोपहर कुछ प्रमुख व्यवसाईयों से चर्चा की। लगभग सभी का मत था कि इसे सिर्फ चाय की प्याली में तूफान के रूप में देखा जाए।



मंडी व्यवसाय इन्द्रेश चंडालिया 

का कहना है कि दो हजार के नोट की शुरुआत हुई थी, तब से ही यह आशंका थी कि यह कभी भी बंद हो सकता है। बैंक भी ज्यादातर लोगों को दो हजार के नोट नहीं दे रही थी लोग मानसिक रूप से तैयार थे कि ये  बंद होगा। इसलिए बड़े से बड़े व्यापारी ने भी यह नोट कम से कम छोटे स्थानों पर तो इकट्ठा नहीं किए। यह दुष्प्रचार है कि यह 2016 की नोटबंदी जैसा मामला है। दरअसल ऐसा कुछ होगा नहीं। यह कोई बड़ी बात नहीं है। ना ही बैंकों में कतारे लगेगी।



    कपड़ा व्यवसाई निलेश गोलेच्छा 

कहते हैं कि कोई बड़ी बात नहीं। ग्रामीणों के पास तो दो हजार के नोट होने का सवाल ही नहीं। और जितने होंगे वह आसानी से बैंक ले रही है। दिक्कत उन्हें हो सकती है, जो बड़े महानगरों के बड़े व्यवसाई हैं। जिनके पास काला धन हो। छोटे कस्बों में व शहरों में इसका कोई असर दिखेगा, मैं ऐसा नहीं मानता।



कृषि उपकरण के बड़े व्यवसाई  बुरहान लुकमानी

 भी लगभग उक्त दोनों व्यवसायियों की बात से सहमत है। वे कहते हैं कि दो हजार के नोट बहुत ज्यादा चलन में थे ही नहीं। इसलिए इसका किसी को कोई बहुत नुकसान होगा, ऐसा मैं नहीं मानता। हो सकता है बहुत बड़े महानगरों में बहुत बड़े व्यापारियों को इससे फर्क पड़े। पर कस्बों, शहरों में दो हजार के नोट बंद होने से कोई फर्क पड़ने वाला नहीं।

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