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24 उपवास की तपस्या करते हुए पूज्य सौम्ययशा श्रीजी का कालधर्म

24 उपवास की तपस्या करते हुए पूज्य सौम्ययशा श्रीजी का कालधर्म


बाजना। सागर समुदायवर्तिनी एवं प्रवचन प्रभाविका परम पूज्य साध्वी सौम्ययशा श्रीजी महाराज का समाधिपूर्वक 24 उपवास की दीर्घ तपस्या करते हुए कालधर्म हो गया। पूज्य श्रीजी की अंतिम यात्रा को मृत्यु महोत्सव के रूप में निकाला गया। अंतिम यात्रा में जैन समाज के साथ-साथ नगर के अजैन समाजजनों ने भी बड़ी संख्या में सहभागिता कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

पूज्य श्रीजी के कालधर्म पर हाट बाजार दिवस होने के बावजूद नगर के व्यापारियों ने अपने व्यापार-व्यवसाय पूर्ण रूप से बंद रखकर श्रद्धांजलि दी। श्रीसंघ के साथ समस्त नगर में शोक की लहर छा गई। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में गुरु भक्त एवं श्रद्धालु शामिल हुए।

पूज्य सौम्ययशा श्रीजी का वर्ष 2011 में बाजना में ऐतिहासिक चातुर्मास हुआ था। उनके प्रति श्रीसंघ की विशेष श्रद्धा और विनती के बाद पुनः भव्य चातुर्मास के लिए 24 जुलाई 2026 को उनका बाजना में मंगल प्रवेश हुआ था। अल्प बीमारी एवं अस्वस्थता के बावजूद पूज्य श्रीजी ने दृढ़ संकल्प के साथ 24 उपवास की दीर्घ तपस्या पूर्ण की और समाधि अवस्था में कालधर्म को प्राप्त हुईं।

अंतिम संस्कार के अवसर पर बड़ी संख्या में समाजजन एवं गुरु भक्त उपस्थित रहे। अग्निसंस्कार के लाभार्थी पूज्य श्रीजी के सांसारिक परिवार, देपालपुर निवासी श्री बाबूलाल मगनलाल मंडवरा परिवार रहे। बताया गया कि बाबूलाल मगनलाल मंडवरा पूज्य श्रीजी के सांसारिक पिता थे।

पूज्य श्रीजी के कालधर्म से जैन श्रीसंघ सहित समूचे नगर में गहरा शोक व्याप्त है। श्रद्धालुओं ने पूज्य श्रीजी के तप, त्याग, संयम एवं धर्म प्रभावना को स्मरण करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

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