श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और महारास की कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु।
सैलाना। पुरुषोत्तम (अधिक) मास के पावन उपलक्ष्य में ओशीन परिसर में आयोजित सप्त दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस पर कथा व्यास पंडित कुलदीप गुरु के मुखारविंद से भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीला एवं महारास लीला का भावपूर्ण वर्णन किया गया।
कथा में पंडित कुलदीप गुरु ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं केवल मनोरंजन का विषय नहीं हैं, बल्कि उनमें गहन आध्यात्मिक और नैतिक संदेश निहित हैं। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने अपने बाल्यकाल में अनेक असुरों का संहार कर धर्म की स्थापना की तथा भक्तों की रक्षा का संदेश दिया। उनकी प्रत्येक लीला मानव जीवन को प्रेम, भक्ति, करुणा और सदाचार का मार्ग दिखाती है।
महारास लीला का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने कहा कि यह लीला आत्मा और परमात्मा के दिव्य मिलन का प्रतीक है। गोपियों का श्रीकृष्ण के प्रति अटूट प्रेम और समर्पण सच्ची भक्ति का सर्वोच्च उदाहरण है। उन्होंने कहा कि जब भक्त पूर्ण श्रद्धा और निष्काम भाव से प्रभु की शरण में आता है, तब भगवान स्वयं उसके जीवन में आनंद और शांति का संचार करते हैं।
कथा के दौरान भजनों और संगीतमय प्रस्तुतियों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु श्रीकृष्ण के जयकारों के साथ भक्ति रस में सराबोर होकर कथा श्रवण करते रहे। बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे और कथा का पुण्य लाभ प्राप्त किया।
*खुब उड़ा रंग गुलाल*
पंडीत कुलदीप गुरु के सुमधुर भजनो के बीच कथा के दौरान बृज की होली मनाई गई। नृत्य गायन के साथ उपस्थित भक्तों ने एक दूसरे पर खुब रंग गुलाल उड़ाया। पंडित कुलदीप गुरु ने कहा कि भागवत कथा में अगर झुमते हुए नृत्य गायन करलोगे तो 84 लाख योनियों में नहीं भटकना पड़ेगा। बाद में सांवरिया जी को 56 भोग लगाया गया। एवं भक्तों को 56 भोग की प्रसादी वितरित की गई। कथा आयोजक एडवोकेट राजेंद्र पाराशर शशी पाराशर डा. दिपक जोशी एवं क्रांति जोशी ने कथा का रसपान कर रहे बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं का आभार माना।


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