सैलाना आदिवासी क्षेत्रों में बिना मुंडेर के कुएं बन रहे हादसों का कारण।
जिला कलेक्टर के निर्देशों की खुलेआम अनदेखी।
सैलाना- सैलाना क्षेत्रों के आदिवासी अंचलो में आज भी बड़ी संख्या में कुएं बिना मुंडेर और सुरक्षा व्यवस्था के खुले पड़े हुए हैं, जोकी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। खेतों, पगडंडियों और ग्रामीण मार्गों के किनारे बने ये खुले कुएं आमजन, बच्चों और पशुओं के लिए लगातार खतरा बने हुए हैं। जिला कलेक्टर ने सुरक्षा को लेकर निर्देश जारी किए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर इनका पालन होता नजर नहीं आ रहा है।
जिला कलेक्टर मिशा सिंह ने पूर्व में बिना मुंडेर वाले कुओं पर सुरक्षा मुंडेर बनवाने तथा पक्के कुओं पर रेडियम पट्टी लगाने के निर्देश दिए थे, ताकि रात के समय राहगीरों को कुओं की पहचान हो सके और दुर्घटनाओं से बचाव हो सके। लेकिन ग्रामीण अंचलों में हालात जस के तस बने हुए हैं। अधिकांश कुएं अब भी खुले हैं और कई स्थानों पर सुरक्षा के नाम पर कोई इंतजाम दिखाई नहीं देता।
*गांवों में खुले कुएं बढ़ा रहे खतरा-*
अडवानी, भेरूघाटा, सकरावदा, कपासिया, नारायणगढ़, रामगढ़, खाखराकुडी और बरडा सहित कई गांवों एवं मार्गों पर पुराने कुओं के साथ नए कुओं का निर्माण भी जारी है। वहीं पुराने पक्के कुओं पर रेडियम संकेतक तक नहीं लगाए गए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात और रात के समय इन खुले कुओं के आस-पास दुर्घटना की आशंका और अधिक बढ़ जाती है। क्षेत्र में पहले भी पशुओं के गिरने और लोगों के घायल होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
*बच्चों और पशुओं पर सबसे अधिक खतरा-*
ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे बच्चे अक्सर खेलते समय खेतों और रास्तों के आस-पास चले जाते हैं। ऐसे में खुले कुएं उनके लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। वहीं पशुपालकों का कहना है कि कई बार मवेशी अंधेरे या बारिश के दौरान खुले कुओं में गिर जाते हैं। जिससे बडा नुकसान होता है।
*प्रशासन के निर्देशों पर अमल नहीं-*
ग्रामीणों का आरोप है कि जिला प्रशासन द्वारा निर्देश जारी करने के बाद भी पंचायत स्तर पर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही। कई पंचायतों में अब तक खुले कुओं की सूची तक तैयार नहीं हुई है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि प्रशासन तत्काल सर्वे कर सभी खुले कुओं की पहचान करे और उनके चारों ओर मजबूत मुंडेर एवं सुरक्षा घेरा बनवाए।
*ग्रामीणों की मांग-*
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि हादसों की आशंका को देखते हुए खुले कुओं पर तत्काल सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाए। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर नियमित निगरानी भी सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़ी जनहानि से बचा जा सके।
*नए कुओं पर भी सख्ती के निर्देश-*
आदिवासी अंचलों में बिना मुंडेर वाले शासकीय और निजी कुओं को लेकर सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। पंचायतों को सरकारी कुओं पर जल्द मुंडेर बनाने अथवा उन्हें ढकवाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही निजी कुओं के मालिकों को भी नोटिस जारी कर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब नए बनने वाले कुओं में मुंडेर निर्माण अनिवार्य होगा। बिना मुंडेर वाले नए कुओं की सीसी जारी नहीं की जाएगी।

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